12 मई 2026 को NTA द्वारा NEET UG रद्द करने के फैसले ने एक बार फिर देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एजेंसी ने माना कि पेपर की अखंडता भंग हुई है, इसलिए छात्र हित में री-एग्जाम ही एकमात्र रास्ता है। लेकिन इस फैसले के साथ ही समाधान की बात भी होनी चाहिए, जैसा डॉ. अलगावेंकटेशन लगातार कह रहे हैं। पहला कदम यह हो कि भविष्य में अगर गड़बड़ी होती है तो जांच एजेंसियां तुरंत चिन्हित करें कि मामला कितना व्यापक है। अगर लीक कुछ ही इलाकों तक सीमित है तो टार्गेटेड री-एग्जाम हो, पूरे देश को परेशान न किया जाए। दूसरा, पारदर्शिता के लिए CBI और NTA रोज़ाना शाम को एक संयुक्त प्रेस नोट जारी करें जिसमें बताया जाए कि आज क्या जांच हुई, कितने लोग गिरफ्तार हुए और आगे की रणनीति क्या है। तीसरा, NTA का पूरा कायाकल्प किया जाए। वहां डॉक्टरों, ईमानदार प्रशासनिक अधिकारियों और AI प्रॉक्टरिंग के एक्सपर्ट्स की एक नई टीम बैठाई जाए जो पेपर सेट करने से लेकर रिजल्ट तक हर स्टेज को फूलप्रूफ बना सके। चौथा और सबसे अहम, कानून को इतना सख्त बनाया जाए कि पेपर लीक साबित होने पर उम्रकैद तक की सज़ा हो। साथ ही 2025 की पेंडिंग जांच रिपोर्ट को तुरंत सार्वजनिक कर उस पर कार्रवाई शुरू की जाए। छात्रों के लिए राहत की बात ये है कि उन्हें दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं करना होगा और फीस भी वापस मिलेगी। मगर असली राहत तब मिलेगी जब सिस्टम सुधरेगा। अगर ये चार कदम उठा लिए जाएं तो NEET का खोया हुआ भरोसा वापस आ सकता है, वरना हर साल कैंसिलेशन का यही ड्रामा दोहराया जाएगा।
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